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ब्लॉग-जगत मे 'बात' : "बात की चूड़ी मर गई"

माँ

लेकॉनिक टिप्पणी का अभियोग ........ऐसा है क्या....? प्रेरणा : आदरणीय ज्ञानदत्त जी...

तुमसे...!!!

अब सवाल ज्यादा सुकून देते हैं.

कि;

यूँ ही बस इधर-उधर विचरना मन का

"उन्माद की उड़नतश्तरी"