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बैंडिट क्वीन

लिखी मैंने एक गजल: "रूबरू"

"...मुझमे तुम कितनी हो..?''

चीन की यह घुसपैठ...

..वैसे हम, बचपन के घनिष्ठ हुआ करते थे.....

कल दिन भर एक कहानी में

आधी रात हो चली है.

"तुम मुस्कुरा रही हो, गंभीर.."

" वजूद"

तुम....?

ताकि...