✍️इतनी घृणा में कैसे जिए आप महात्मा?

(किसी तथाकथित साध्वी ने महात्मा गाँधी के पुतले को गोली मारकर नाथूराम गोडसे को याद किया था , उसी पर मेरी प्रतिक्रिया )

डॉ. श्रीश पाठक 

Image Source: NY Times
✍️इतनी घृणा में कैसे जिए आप महात्मा?

सिर्फ इसलिए कि नए भारत में फिर कोई बाँटकर राज न करने लगे, इसलिए कि नये भारत पर कोई अन्याय का लांछन न लगा सके, इसलिए कि नया भारत सभी को समाहित कर विश्व को अभूतपूर्व उदाहरण दे सके और वसुधैव कुटुम्बकम को चरितार्थ कर सके।

अन्ततः एक कायर ने जब आपके नाशवान शरीर को समाप्त कर यह सोचा कि आपके कृतित्व की भी हत्या कर सकेगा, आपने उन अंतिम क्षणों में 'हे राम' पुकार कर उसके बचे खुचे जमीर को भी झिझोड़ दिया होगा। कहते हैं उस आतंकी ने पहले अपना नाम मुस्लिम बताने की कोशिश की थी, कितनी जघन्य थी उसकी मंशा। हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के चरमपंथियों को उन दिनों दंगा चाहिये था ताकि धर्म के आधार पर राष्ट्र बने और एक चरमपंथी निर्बाध सत्ता सुख लिया जा सकता। मुस्लिम अतिवादी इसमें सफल भी हो गये, पर हिंदू अतिवादी वह स्वप्न अभी भी पूरा करना चाहते हैं।

हे महात्मा, पहली बार तो आपके बारे में मुझे शिशु मंदिर के आचार्यों ने ही बताया था, आपके बारे में एक बेहद उदात्त छवि गढ़ी थी, तब तो नहीं शेष थी यह घृणा, फिर किसने यह तार छेड़ा है, फिर किसे अपनी महत्वाकांक्षा के समक्ष, समस्त सनातन परंपरा बौनी लग रही? शिशु मंदिर के उन संस्कृत संभाषण शिविरों से संत और साध्वी का जो माहात्म्य मन में बना था, वह आज मुझसे बेहद रोष से प्रश्न करता है कि यह साध्वी है तो इसमें यह कैसी प्रज्ञा है कि भगवा रंग स्वीकार करने के बाद भी जिसमें सिंह और ठाकुर शेष है और इसने एक आतंकी को कैसे महात्मा कह दिया जबकि वह उस महात्मा का हत्यारा है जिसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रपिता और कविवर टैगोर ने महात्मा कहा था?

पर मुझे विश्वास है महात्मा, इस बेतुके उन्माद पर आपका कृतित्व हावी रहेगा, अंततः अहिंसा की संस्कृति, हिंसा की विकृति पर विजय प्राप्त करेगी।

#श्रीशउवाच

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