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Brainstorming about Ideologies

महापुरुष वे होते हैं जिनकी अपनों की परिभाषा सुदीर्घ होती है

मजदूरों के आह से बच तो कोई न पाएगा।

कितना कुछ अनटच्ड रह जाता है न , टचस्क्रीन मोहब्बतों के दौर में l

इंदिरा गाँधी व नरेंद्र मोदी: डिसाईजिव या डेकोरेटिव?

Three Things by Dr. Shreesh: PM Modi Addresses NAM Contact Group

✍️तहजीब के मायने यों तो गहरे हो सकते थे पर फ़िलहाल पर्दादारी इसका शॉर्टकट है

लोकतांत्रिक व्यवस्था एक ऐसी व्यवस्था है जिससे कम पर अब कुछ नहीं स्वीकारा जा सकता

बुद्ध एक व्यक्ति के विराट प्रकटीकरण की सम्भावना को सरल चरितार्थ कर रहे

स्कोप, फील्ड का नहीं, आपका होता है

मार्क्स का जन्मदिन

#लोकतंत्र_में_प्रश्न

मुझे अपनी नाकामियाँ भी कम प्रिय नहीं हैं, उनमें भी मै ही हूँ।